रोजाना तेरह घंटे के अथक अध्ययन और दृढ़ संकल्प शक्ति के बल पर गांव रायपुर कलां (घरौंडा) के हर्ष बघेल ने हरियाणा न्यायिक सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की है। हर्ष बघेल के पिता डीपी बघेल जिला अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। हर्ष बघेल डा.भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। दैनिक जागरण के साथ बातचीत में हर्ष बघेल ने बताया कि उन्हें यह प्रेरणा अपने पिता से मिली। उनके पिता एडवोकेट डीपी बघेल ने वर्ष 1975 और 1976 में हरियाणा न्यायिक सेवा की परीक्षाएं दी थी लेकिन वह इस कठिन परीक्षा में सफल नहीं हो सके। अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए हर्ष बघेल ने 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण करते हुए पांच वर्ष तक वकालत की। वर्ष 2006 में वे डा. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के परीक्षाफल में टॉपर आने के बाद स्वर्ण पदक से सुशोभित किए गए। स्वर्ण पदक मिलने के बाद उनमें हरियाणा न्यायिक सेवा को उत्तीर्ण करने का जज्बा मिला। इसके लिए उन्होंने दिल्ली मुखर्जी नगर स्थित राहुल आइएएस केंद्र से कोचिंग लेनी शुरू कर दी। हर्ष बघेल ने बताया कि उन्होंने इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए दो वर्ष तक तेरह घंटे दृढ़ संकल्प शक्ति के साथ अध्ययन किया है। अध्ययन के लिए संयमित भोजन, व्यायाम और योग बहुत जरूरी होता है। इसके साथ अध्ययन करने से स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास कई गुणा बढ़ जाता है। बगैर कोचिंग के ही जीत ली जंग फरीदाबाद, जासंकें : सेक्टर-21बी निवासी रजत गोयल ने भी हरियाणा न्यायिक सेवाएं की परीक्षा को उत्तीर्ण करके अपने पिता पीएल गोयल का सपना साकार किया है। रजत गोयल ने यह कामयाबी बगैर कोचिंग सेंटर के हासिल की है। रजत गोयल कहती हैं कि उन्हें यह कामयाबी उनके पिता एडवोकेट पीएल गोयल की बदौलत मिली है। बता दें कि पीएल गोयल जिला फरीदाबाद अदालत में ही अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश थे। रजत गोयल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से वर्ष 2008 में वकालत की पढ़ाई की थी।